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बाइबल को समझना- पहला भाग 01

भाग  पहला ========================== बाइबल  को समझना बाइबिल यीशु मसीह को जगत का उद्धारकर्ता के रूप में चित्रित करती हैं | बाइबिल परमेश्वर का  लिखित प्रकाशन  हैं जिसमे मनुष्यों के लिए इच्छा प्रकट होती है ’’ (यानि बाइबिल पढ़ क्र परमेश्वर की इच्छा को जान सकते है)  इसका मूल्य विषय ‘ प्रभु यीशु मसीह के द्वारा उद्धार हैं ’ | बाइबिल  66 छोटी-छोटी पुस्तको से मिलकर बनी हैं एक पुस्त्काले  (पुरे बाइबिल में  66  पुस्तके  पाए जाते हैं) और यह 40 लेखकों द्वारा लिखी गई और इसको लिखने में लगभग 1600 वर्ष लगे! यह  दो भागो में पाया जाता हैं 1.  पुराना नियम -(पुस्तके 39) 2.  नया  नियम ( पुस्तके 27) 1. नियम का अर्थ हैं ’ वाचा ’  या ‘ सहमति ’  | पुराना नियम वह वाचा हैं जिसे परमेश्वर में मसीह के आगमन से पूर्व मानुष्य से उसके उद्धार के लिए बाँधी थी | 2. नया नियम वह वाचा है (सहमति) है जिसे परमेश्वर ने मसीह के आगमन के पश्चात् मनुष्य से उसके उद्धार के लिए बाँधी हैं | पुराना नियम में हम व्यवस्था की वाचा...

परमेश्वर के स्वभाव को प्रकट करती हैं

               परमेश्वर  के नाम उसके स्वभाव को प्रकट करते हैं                  इब्रानी भाषा में परमेश्वर को नाम देने के लिए विभिन्न शब्दों का प्रयोग किया गया हैं |                         हिंदी भाषा में इनका अनुवाद ‘ परमेश्वर ’  या ‘ प्रभु ’  के रूप में किया गया हैं |                 निचे परमेश्वर के कुछ नाम और उनके अर्थ दिय गए हैं.                        1.  यहोवा  -------------------{स्वयं अस्तित्त्व}                     प्रथम प्रयोग सृष्टीकर्ता के रूप में किया गया... उत्त 2:4                        2.  यहोवा-यीरे ---------------{परमेश्वर स्वयं उपाय करता हैं       ...

परमेश्वर अपरिवर्तनीय हैं इसका क्या मतलब होता हैं

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अपरिवर्तनीय का अर्थ हैं == ईश्वर कभी भी बदल नहीं हैं! ईश्वर  पर भरोसा हम इसलिए करते हैं की उसने जो कहा है उसे कह रहे हैं कभी भी पीछे नहीं मुकरता हैं (वे इंसानों की तरह नहीं) भगवान के तमाम निर्णय उसकी पवित्रता, न्यायी के गुण को कभी बदल नहीं सकता है | उसके कार्य कभी भी नहीं बदल सकते हैं क्योंकि उसके कोई भी गुण किसीके गुणों के विरुध नहीं हो सकते हैं! वो खुदा इंसानों के तरह नहीं हैं जो बक्त देख कर अपने फैसले को पलट रहे हैं | लोगों के प्रश्न - जिस ईश्वर ने आकाश और पृथ्वी को अपने सामर्थ्य शव्दों से बनाया, शक्तिशाली, दयालु, प्रेमी ईश्वर हमारे पापो की क्षमा (माफ़) अपने सामर्थ्य शव्दों से क्यूँ नहीं किया है ?????? एक बात याद हो ईश्वर दयालु एवम प्रेमी हैं तो साथ में वह न्यायी भी हैं वह पाप से घृणा और पवित्रता से प्रेम करते हैं! जब आदम और हवा ने पाप किया तो उसने ईश्वर के नियम और कानून को तोडा | जिस कारण मानव पापी हो गया | सवाल यह हैं कि ईश्वर दयालु हैं तो उन्होंने यीशु मसीह को हमारे पापो के लिए क्यों मरने दिया? जैसे ----- इस दुनिया के कानून में एक न्यायीधिस पाया जाता है जो ...